Monday, July 20, 2009

खराब दौर से गुजरती तकनीकी शिक्षा

शिक्षा से जुड़ी देश की दो प्रतिष्ठित सरकारी संस्थाओं- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की भ्रष्ट कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षा जगत में चिंता होनी वाजिब है। पहली संस्था का गठन देश-समाज को होशियार व होनहार इंजीनियर और दूसरी का गठन अच्छे चिकित्सक मुहैया करवाने के लिए किया गया था।देश भर में चल रहे हजारों निजी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों को नियंत्रित करने वाली इन संस्थाओं पर केंद्र सरकार का नियंत्रण कितना ढीला है, यह एआईसीटीई के दफ्तर और वरिष्ठ अधिकारियों के घरों पर सीबीआई के छापों से साफ हो गया है। एआईसीटीई में व्याप्त भ्रष्टाचार का सीधा संबंध देश के इंजीनियरिंग छात्रों की गुणवत्ता से है।
यह संस्था तमाम निजी कॉलेजों को मान्यता देती है। कुकुरमुत्तों की तरह उग आए निजी कॉलेजों मंे जो हालात हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं। एआईसीटीई में किस तरह पैसा ले-देकर मान्यताएं हासिल की जाती हैं, यह हैदराबाद के कॉलेज से लाखों रुपए मांगने वाले एआईसीटीई के अधिकारी को सीबीआई द्वारा रंगे हाथों पकड़ने के बाद सामने आ ही चुका है।
यही हाल कमोबेश सभी राज्यों में देखा जा सकता है। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री की पुत्री का दखल एआईसीटीई में काफी था जिससे सभी कॉलेज संचालक अवगत थे। वहां के सभी गोरखधंधे इसी माध्यम से चलते थे।
तकनीकी शिक्षा के शीर्ष संस्थान के अध्यक्ष और सचिव पर रिश्वतखोरी का आरोप हो और सीबीआई रंगे हाथों सचिव को पकड़े, उससे साफ है कि तकनीकी शिक्षा का तंत्र कितना सड़-गल चुका है। प्रो. यशपाल कमेटी ने एआईसीटीई को खत्म करने की अनुशंसा हाल ही में की है, जिसे माना जाना चाहिए।
एक तरफ प्रधानमंत्री देश को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने और उच्च शिक्षा पर जोर देने जैसी बातें कर रहे हैं, दूसरी तरफ एआईसीटीई में भ्रष्टाचार गहरे तक पैठा हुआ है। अध्यक्ष पद पर बैठने वाला व्यक्ति राजनीतिक जोड़-तोड़ के बिना वहां पहुंच ही नहीं सकता।
देश की तरक्की के लिए हमें बेहतर युवा डॉक्टरों, इंजीनियरों और उच्च शिक्षित युवाओं की जरूरत है। अभिभावक ऋण तक लेकर बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के सपने देखते हैं। जिस तंत्र के कंधों पर इन बच्चों को गढ़ने का काम है, उसे चुस्त-दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी शासन की है। इसी के चलते नए मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल से देश को काफी उम्मीदें हैं।

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